पीलीभीत को मिली ऐतिहासिक सौगात: देश का दूसरा बासमती और पहला राष्ट्रीय जैविक प्रशिक्षण केंद्र बनेगा
पीलीभीत। जनपद के कृषि विकास और किसानों की समृद्धि के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री जितिन प्रसाद के विशेष प्रयासों से पीलीभीत को देश का दूसरा ‘बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान’ और देश का पहला ‘राष्ट्रीय जैविक प्रशिक्षण केंद्र सह प्रदर्शन फार्म’ मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया। पीलीभीत-खटीमा मार्ग स्थित टांडा बिजेसी राज्य कृषि फार्म में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद की मौजूदगी में भूमि हस्तांतरण संबंधी लीज डीड और एमओयू पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए गए। शासन के वरिष्ठ अधिकारियों और एपीडा (कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में यह प्रक्रिया पूरी हुई। लीज डीड हस्तांतरण के साथ ही अब केंद्र निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। यह परियोजना न केवल पीलीभीत बल्कि पूरे तराई क्षेत्र और आसपास के राज्यों के किसानों के लिए कृषि क्षेत्र में नई क्रांति लेकर आएगी। वर्तमान में देश का एकमात्र बासमती प्रशिक्षण केंद्र मेरठ के मोदीपुरम में संचालित है। पीलीभीत में स्थापित होने वाला नया केंद्र देश का दूसरा ऐसा संस्थान होगा, जहां किसानों को बासमती उत्पादन, गुणवत्ता सुधार, निर्यात मानकों और अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही पीलीभीत देश का पहला राष्ट्रीय जैविक प्रशिक्षण केंद्र एवं प्रदर्शन फार्म बनकर नई पहचान स्थापित करेगा। यहां किसानों को रसायन मुक्त खेती, जैविक उत्पादन, प्रमाणन प्रक्रिया और वैश्विक बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने की उन्नत जानकारी दी जाएगी। वाणिज्य मंत्रालय की संस्था एपीडा द्वारा संचालित इस परियोजना के अंतर्गत अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, प्रशिक्षण केंद्र, प्रदर्शन फार्म और उन्नत बीज विकास सुविधाएं विकसित की जाएंगी। केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में यह बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि इस केंद्र के खुलने से पीलीभीत का किसान बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेती कर सीधे निर्यात से जुड़ सकेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, कृषि आधारित उद्योगों को मजबूती मिलेगी और पीलीभीत को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक कृषि मानचित्र पर नई पहचान प्राप्त होगी।