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चार सूत्रीय मांगों को लेकर ग्रामीण सफाई कर्मचारियों ने भरी हुंकार, जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
पीलीभीत। उत्तर प्रदेश पंचायतीराज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ की जिला शाखा ने ग्रामीण सफाई कर्मचारियों की विभिन्न लंबित समस्याओं और मांगों के स्थायी समाधान को लेकर अपना सुर मुखर कर दिया है। इसी क्रम में संघ के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने एकत्र होकर अपनी मांगों के समर्थन में मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं को रेखांकित करते हुए सरकार से उन पर सहानुभूतिपूर्वक और शीघ्र निर्णय लेने की अपील की। सौंपे गए ज्ञापन में कर्मचारियों ने मुख्य रूप से पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने समेत चार अत्यंत महत्वपूर्ण मांगें प्रमुखता से रखी हैं। कर्मचारियों का कहना है कि नई पेंशन योजना के तहत उनका भविष्य पूरी तरह से असुरक्षित और अनिश्चित बना हुआ है। सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों के पास जीवनयापन का कोई ठोस सहारा नहीं बचता है, जिससे वे बुढ़ापे में खुद को असहाय महसूस करते हैं। संघ ने पुरजोर शब्दों में मांग की है कि कर्मचारियों को उनके सेवाकाल के बाद एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मिलना चाहिए, जिसके लिए पुरानी पेंशन योजना को तत्काल प्रभाव से पुन: लागू किया जाना बेहद जरूरी है। इसके बिना कर्मचारियों के हितों की रक्षा संभव नहीं है। पुरानी पेंशन के अलावा ज्ञापन में पंचायतीराज विभाग के अंतर्गत कार्यरत सभी ग्रामीण सफाई कर्मचारियों के लिए एक सुदृढ़ और स्पष्ट सेवा नियमावली बनाने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया गया है। संघ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वर्ष 2008 में एक विशेष शासनादेश के तहत हजारों सफाई कर्मचारियों की भर्ती की गई थी, लेकिन विडंबना यह है कि इतने लंबे वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक उनकी सेवा नियमावली तैयार नहीं की जा सकी है। सेवा नियमावली के अभाव में कर्मचारियों को कई तरह की तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और उनके अधिकार भी सीमित हो जाते हैं। इसके साथ ही संगठन ने विभागीय स्तर पर कर्मचारियों की उन्नति के रास्ते खोलने की वकालत की है। ज्ञापन में मांग की गई है कि ग्रामीण सफाई कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति के उचित और पर्याप्त अवसर प्रदान किए जाएं ताकि उनका कार्य के प्रति उत्साह बना रहे। साथ ही वर्तमान विभागीय संरचना और कार्य की प्रकृति को देखते हुए उनके पदनाम को भी परिवर्तित किया जाना चाहिए, जिससे कर्मचारियों को समाज और विभाग में एक सम्मानजनक पहचान मिल सके। लंबे समय से एक ही पद पर कार्य करते रहने से कर्मचारियों में निराशा की भावना पनप रही है, जिसे दूर करना अत्यंत आवश्यक है। इस पूरे मामले पर संघ के जिलाध्यक्ष धर्मपाल सिंह और जिला महामंत्री रामसेवक वाल्मीकि ने संयुक्त रूप से कहा कि ग्रामीण सफाई कर्मचारी विपरीत परिस्थितियों में भी ग्रामीण क्षेत्रों की स्वच्छता और स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए दिन-रात अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन कर रहे हैं। ऐसे में सरकार और प्रशासन का यह नैतिक कर्तव्य बनता है कि उनकी जायज समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उन्होंने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री इन मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए सफाई कर्मचारियों के हित में जल्द ही कोई सकारात्मक और ठोस कदम उठाएंगे।
